18, February 2018 4:33 PM
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​चित्रकूट का चुनाव अब मतदान के साथ ही निपट गया और पंद्रह दिनों से चल रही नेताओं की दामर भी ख़त्म हो गईकांटे का चुनाव था ! एक तरफ भाजपा नेता मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ भारतीय जनता पार्टी के  विनय सहस्राबुदधे , नंद किशोर चौहान ,अभिलाष पांडेय ,लता एलकर ,फगगन सिंह कुलसते, संपतिया उइके ,सुहाष भगत ,केदारनाथ शुक्ल ,अरुण द्विवेदी, गिरीश द्विवेदी ,रामपाल सिंह,उमाशंकर गुप्ता,  ओमप्रकाश घुर्वे ,ललिता  सिंह ,विश्वास सारंग ,गोपाल भार्गव ,राजेंद्र शुक्ल , एवं बी डी शर्मा की प्रतिस्पर्धित शाख भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी शंकर दयाल त्रिपाठी के ऊपर दाँव पर लगी हैं ।तो वही जमीनी तौर पर चुनाव के नतीजो के पहले ही चुनाव का रंग रंगीन कर भूचाल ला देने वाले कांग्रेस के दीपक बावरिया, जुबेर खान ,अजय सिंह राहुल , ज्योतियाराजे सिंधिया ,कमलनाथ, अरुण यादव, कांतिलाल भूरिया, राजेंद्र सिंह, कुणाल चौधरी, मुकेश नायक, इंद्र जीत पटेल ,राजा पटैरिया, भगवान सिंह यादव समेत यादुवेंद्र सिंह की प्रतिष्ठा कांग्रेस प्रत्याशी निलांशू चतुर्वेदी के साथ दाँव पर लगी है ।प्रतिष्ठापूर्ण  इस सीट को  कांग्रेस को  दिखाना है कि सीट उनकी है ! वास्तव में, यह बरौंधा के स्व. प्रेम सिंह की विधानसभा सीट है ! वे तीन-चार बार यहाँ से विधायक चुने गए ! स्व. अर्जुन सिंह ने अपने जमाने में उन्हें यहाँ से कांग्रेस की टिकट दी थी ! स्वाभाविक तौर पर वे उनके और अजय सिंह राहुल के कट्टर समर्थक थे ! प्रेम भैया की आकस्मिक मृत्यु की वजह से यह उपचुनाव हो रहा है !कांग्रेस उम्मीदवार ; नयागांव स्टेट के चौबे राजा परिवार के बेटे नीलांशु चतुर्वेदी को लोग नगर पंचायत अध्यक्ष बनने से पहले भी जानते थे मगर भाजपा उम्मीदवार शंकर दयाल त्रिपाठी विधानसभा क्षेत्र के लिए कमोवेश नए हैं हालांकि पार्टी के वे पुराने कार्यकर्ता हैं ! एक तरह से उन्हें भरहुत नगर पार्टी कार्यालय से उठाकर सीधे बगदरा घाटी में उतार दिया गया है ! अब देखिये उनका क्या होता है !राजनैतिक दलों, खासकर भाजपा ने आजकल अपने “सिम्बल” की दम भरते हुए उम्मीदवारों को उपेक्षित करना आरम्भ कर दिया है ! भाजपा के पोस्टरों-विज्ञापनों में मुख्यमंत्री और पार्टी अध्यक्ष के तौर पर दोनों चौहानों के फोटो तो थे पर भाई शंकर दयाल का चेहरा गायब था, जबकि होना चाहिए था ! हर जगह मोदी की नक़ल निरर्थक है !जहाँ तक चित्रकूट का सवाल है यह शताब्दियों से उपेक्षित क्षेत्र है ! भाजपा ने भी इसे शायद कांग्रेसी नेता प्रेम सिंह का इलाका समझ कर छोड़ रखा था ! सतना से चित्रकूट के बीच की मुख्य सड़क और चित्रकूट बस्ती में नानाजी देशमुख के कुछ प्रकल्पों को छोड़ दिया जाए तो शेष क्षेत्र जंगल पड़ा है जो अब पठारी बीहड़ में बदलता जा रहा है ! वन विभाग हो, चाहे समाज कल्याण विभाग कोई सरकारी विभाग यहाँ निगाहे-करम नहीं करता ! वन विभाग यहाँ तेंदूपत्ता अवश्य तुड़वाता है ; पत्थर-ढोका, रामरज खोदने के लिए लीज बेचता है और हर तीन-चार माह में यहाँ पन्ना तरफ से आने वाले बाघों को दूर से देखता रहता है ! जंगलों का सफाया करने के लिए दादुओं की गैंग सक्रिय है ! लकड़ी काट कर इन्हें सैकड़ों महिलाओं और कुछ रेलों के माध्यम से रोजाना सतना भेज दिया जाता है ! पहाड़ियां नंगीं और जंगल मैदान बन गए हैं ! आदिवासियों का निरंतर पलायन हो रहा है ! फिर भी, तराई में कुछ खाइयां-खोहें ऎसी हैं जहाँ वनस्पति अभी बची हुई है !अभी हाल चुनाव के दरम्यान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सरभंगा में रात रुके थे तो एक बाघिन भी उन्हीं के नजदीक बसेरा करने पहुँच गई ! वन विभाग का उच्च अमला भी बाघिन को खोजते वहां पहुँच गया ! चुनाव का सबसे बड़ा तमाशा आदिवासियों के यहाँ मुख्यमंत्री चौहान के बसेरा सम्बन्धी मसले पर हुआ जब रातों-रात गरीब आदिवासी के घर को “थ्रीस्टार होटल” में बदल दिया गया और सबेरे चौहान साहब के जाते ही गरीबदास के यहाँ से सोफा-पलंग आदि सारा सामान समेट कर ले जाया गया ! यहाँ तक कि शौचालय की शीट के ऊपर लगी प्लाई तक अधिकारी उखाड़ कर ले गए ! यह घटना चुनाव में सर्वाधिक प्रचारित रही और जो काम ज्योतिरादित्य सिंधिया, कमलनाथ, भूरिया, राजा पटैरिया और राहुल सिंह के भाषणों ने नहीं किया, इस घटना ने किया ! अरे, कम से कम शौचालय की शीट की पलाई  तो वहीँ लगी रहने देते ! शौचालय बनाना तो वैसे भी एक राष्ट्रीय कर्तव्य है !खैर, जो भी हुआ ! क्षेत्र में दोनों पार्टियों से नरेन्द्र मोदी और राहुल गांधी को छोड़कर प्रदेश स्तर का हर बड़ा नेता प्रचार में आया ! मुख्यमंत्री ने तो धाराप्रवाह घोषणाओं की झड़ी लगा दी ! असल में चौहान और राहुल भैया दोनों की नाक इस चुनाव में फंसी है ! देखो क्या होता है – कौन विधायक बनता है एक साल के लिए ! अगले साल इन्हीं दिनों फिर विधायक का चुनाव होगा !

​चित्रकूट का चुनाव अब मतदान के साथ ही निपट गया और पंद्रह दिनों से चल रही नेताओं की दामर भी ख़त्म हो गईकांटे का चुनाव था ! एक तरफ भाजपा नेता मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ भारतीय जनता पार्टी के  विनय सहस्राबुदधे , नंद किशोर चौहान ,अभिलाष पांडेय ,लता एलकर ,फगगन सिंह कुलसते, संपतिया उइके ,सुहाष भगत ,केदारनाथ शुक्ल ,अरुण द्विवेदी, गिरीश द्विवेदी ,रामपाल सिंह,उमाशंकर गुप्ता,  ओमप्रकाश घुर्वे ,ललिता  सिंह ,विश्वास सारंग ,गोपाल भार्गव ,राजेंद्र शुक्ल , एवं बी डी शर्मा की प्रतिस्पर्धित शाख भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी शंकर दयाल त्रिपाठी के ऊपर दाँव पर लगी हैं ।
तो वही जमीनी तौर पर चुनाव के नतीजो के पहले ही चुनाव का रंग रंगीन कर भूचाल ला देने वाले 

कांग्रेस के दीपक बावरिया, जुबेर खान ,अजय सिंह राहुल , ज्योतियाराजे सिंधिया ,कमलनाथ, अरुण यादव, कांतिलाल भूरिया, राजेंद्र सिंह, कुणाल चौधरी, मुकेश नायक, इंद्र जीत पटेल ,राजा पटैरिया, भगवान सिंह यादव समेत यादुवेंद्र सिंह की प्रतिष्ठा कांग्रेस प्रत्याशी निलांशू चतुर्वेदी के साथ दाँव पर लगी है ।
प्रतिष्ठापूर्ण  इस सीट को  कांग्रेस को  दिखाना है कि सीट उनकी है ! वास्तव में, यह बरौंधा के स्व. प्रेम सिंह की विधानसभा सीट है ! वे तीन-चार बार यहाँ से विधायक चुने गए ! स्व. अर्जुन सिंह ने अपने जमाने में उन्हें यहाँ से कांग्रेस की टिकट दी थी ! स्वाभाविक तौर पर वे उनके और अजय सिंह राहुल के कट्टर समर्थक थे ! प्रेम भैया की आकस्मिक मृत्यु की वजह से यह उपचुनाव हो रहा है !
कांग्रेस उम्मीदवार ; नयागांव स्टेट के चौबे राजा परिवार के बेटे नीलांशु चतुर्वेदी को लोग नगर पंचायत अध्यक्ष बनने से पहले भी जानते थे मगर भाजपा उम्मीदवार शंकर दयाल त्रिपाठी विधानसभा क्षेत्र के लिए कमोवेश नए हैं हालांकि पार्टी के वे पुराने कार्यकर्ता हैं ! एक तरह से उन्हें भरहुत नगर पार्टी कार्यालय से उठाकर सीधे बगदरा घाटी में उतार दिया गया है ! अब देखिये उनका क्या होता है !
राजनैतिक दलों, खासकर भाजपा ने आजकल अपने “सिम्बल” की दम भरते हुए उम्मीदवारों को उपेक्षित करना आरम्भ कर दिया है ! भाजपा के पोस्टरों-विज्ञापनों में मुख्यमंत्री और पार्टी अध्यक्ष के तौर पर दोनों चौहानों के फोटो तो थे पर भाई शंकर दयाल का चेहरा गायब था, जबकि होना चाहिए था ! हर जगह मोदी की नक़ल निरर्थक है !
जहाँ तक चित्रकूट का सवाल है यह शताब्दियों से उपेक्षित क्षेत्र है ! भाजपा ने भी इसे शायद कांग्रेसी नेता प्रेम सिंह का इलाका समझ कर छोड़ रखा था ! सतना से चित्रकूट के बीच की मुख्य सड़क और चित्रकूट बस्ती में नानाजी देशमुख के कुछ प्रकल्पों को छोड़ दिया जाए तो शेष क्षेत्र जंगल पड़ा है जो अब पठारी बीहड़ में बदलता जा रहा है ! वन विभाग हो, चाहे समाज कल्याण विभाग कोई सरकारी विभाग यहाँ निगाहे-करम नहीं करता ! वन विभाग यहाँ तेंदूपत्ता अवश्य तुड़वाता है ; पत्थर-ढोका, रामरज खोदने के लिए लीज बेचता है और हर तीन-चार माह में यहाँ पन्ना तरफ से आने वाले बाघों को दूर से देखता रहता है ! जंगलों का सफाया करने के लिए दादुओं की गैंग सक्रिय है ! लकड़ी काट कर इन्हें सैकड़ों महिलाओं और कुछ रेलों के माध्यम से रोजाना सतना भेज दिया जाता है ! पहाड़ियां नंगीं और जंगल मैदान बन गए हैं ! आदिवासियों का निरंतर पलायन हो रहा है ! फिर भी, तराई में कुछ खाइयां-खोहें ऎसी हैं जहाँ वनस्पति अभी बची हुई है !
अभी हाल चुनाव के दरम्यान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सरभंगा में रात रुके थे तो एक बाघिन भी उन्हीं के नजदीक बसेरा करने पहुँच गई ! वन विभाग का उच्च अमला भी बाघिन को खोजते वहां पहुँच गया ! चुनाव का सबसे बड़ा तमाशा आदिवासियों के यहाँ मुख्यमंत्री चौहान के बसेरा सम्बन्धी मसले पर हुआ जब रातों-रात गरीब आदिवासी के घर को “थ्रीस्टार होटल” में बदल दिया गया और सबेरे चौहान साहब के जाते ही गरीबदास के यहाँ से सोफा-पलंग आदि सारा सामान समेट कर ले जाया गया ! यहाँ तक कि शौचालय की शीट के ऊपर लगी प्लाई तक अधिकारी उखाड़ कर ले गए ! यह घटना चुनाव में सर्वाधिक प्रचारित रही और जो काम ज्योतिरादित्य सिंधिया, कमलनाथ, भूरिया, राजा पटैरिया और राहुल सिंह के भाषणों ने नहीं किया, इस घटना ने किया ! अरे, कम से कम शौचालय की शीट की पलाई  तो वहीँ लगी रहने देते ! शौचालय बनाना तो वैसे भी एक राष्ट्रीय कर्तव्य है !
खैर, जो भी हुआ ! क्षेत्र में दोनों पार्टियों से नरेन्द्र मोदी और राहुल गांधी को छोड़कर प्रदेश स्तर का हर बड़ा नेता प्रचार में आया ! मुख्यमंत्री ने तो धाराप्रवाह घोषणाओं की झड़ी लगा दी ! असल में चौहान और राहुल भैया दोनों की नाक इस चुनाव में फंसी है ! देखो क्या होता है – कौन विधायक बनता है एक साल के लिए ! अगले साल इन्हीं दिनों फिर विधायक का चुनाव होगा !

Written by लवलेश पाण्डेय - Visit Website
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