18, February 2018 4:29 PM
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चित्रकूट का इतिहास  चित्रकूट धाम मंदाकिनी नदी के किनारे पर बसा हुआ भारत के सबसे प्राचीन तीर्थस्थलों में एक है।

चित्रकूट का इतिहास  चित्रकूट धाम मंदाकिनी नदी के किनारे पर बसा हुआ भारत के सबसे प्राचीन तीर्थस्थलों में एक है।

 

उत्तर प्रदेश में 38.2 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला शांत और सुन्दर चित्रकूट प्रकृति और ईश्वर की अनुपम देन है।

 

चारों तरफ से विन्ध्य पर्वत मालाओं और घने वनों से घिरे चित्रकूट को अनेक आश्चर्यो की पहाड़ी कहा जाता है। मंदाकिनी नदी के किनारे पर बने अनेक घाट और मंदिर में पूरे साल भर श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है। कहा जाता है

 

कि भगवान राम ने माता सीता और भाई लक्ष्मण के साथ अपने वनवास के चौदह वर्षो में ग्यारह वर्ष चित्रकूट में ही बिताए थे। इसी स्थान पर ऋषि अत्रि और सती अनसुइया ने ध्यान लगाया था।

 

ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों देवताओं ने चित्रकूट में ही सती अनसुइया माँ के घर जन्म लिया था। कामदगिरि कामदगिरि के पवित्र पर्वत का काफी धार्मिक महत्व है।

 

भक्त लोग कामदगिरि पर्वत की 5 किलोमीटर की परिक्रमा कर अपनी मनोकामनाएं पूरी होने की कामना करते हैं। जंगलों से घिरे इस पर्वत के तल पर अनेक मंदिर बने हुए हैं। चित्रकूट के लोकप्रिय कामतानाथ और भरत मिलाप मंदिर भी यहीं स्थित है।

 

रामघाट राम घाट वह घाट है जहाँ पर प्रभु श्रीराम रोज नहाने जाया करते थे। इसी घाट पर श्रीराम भाई भारत के मिलाप का मंदिर बना हुआ है। और इसी घाट पर गोस्वामी तुलसीदास जी की प्रतिमा भी है।

 

मंदाकिनी नदी के किनारे पर बने रामघाट में अनेक धार्मिक क्रियाकलाप चलते रहते हैं। घाट में गेरूआ वस्त्र धारण किए साधु-सन्तों को भजन और कीर्तन करते देख बहुत अच्छा महसूस होता है।

 

शाम को होने वाली यहां की आरती मन को काफी सुकून पहुंचाती है। जानकी कुण्ड रामघाट से 2 किलोमीटर की दूरी पर मंदाकिनी नदी के किनार जानकी कुण्ड बना है। जनक राजा की पुत्री होने के कारण सीता माता को जानकी कहा जाता था।

 

कहा जाता है कि माता जानकी यहां स्नान करती थीं। जानकी कुण्ड के समीप ही राम जानकी रघुवीर मंदिर और संकट मोचन मंदिर है। स्फटिक शिला जानकी कुण्ड से कुछ दूरी पर मंदाकिनी नदी के किनार ही यह शिला स्थित है। कहा जाता है

 

कि इस शिला पर सीता माता के पैरों के निशान बने हुए हैं। कहा जाता है कि जब माता सीता शिला पर खड़ी थीं तो जयंत ने काक रूप धारण कर उन्हें चोंच मारी थी। इस शिला पर श्रीराम और माता सीता बैठकर चित्रकूट की सुन्दरता निहारते थे।

 

गुप्त गोदावरी शहर से 18 किलोमीटर की दूरी पर गुप्त गोदावरी नदी स्थित हैं। यहां पर दो गुफाएं हैं। एक गुफा चौड़ी और ऊंची है। प्रवेश द्वार संकरा होने के कारण इसमें आसानी से नहीं जाया जा सकता।

 

गुफा के अंत में एक छोटा तालाब है जिसे गोदावरी नदी कहा जाता है। दूसरी गुफा लंबी और संकरी है जिससे हमेशा पानी बहता रहता है। कहा जाता है कि इस गुफा के अंत में श्रीराम और भाई लक्ष्मण ने दरबार लगाया था।

 

हनुमान धारा पहाड़ी के ऊचे शिखर पर स्थित हनुमान धारा में हनुमानजी की एक विशाल मूर्ति है। मूर्ति के ही सामने तालाब में झरने से पानी गिरता है। कहा जाता है कि यह धारा श्रीराम ने लंका दहन से आए हनुमानजी के आराम के लिए बनवाई थी।

 

पहाड़ी के शिखर पर ही ‘सीता रसोई’ है। यहां से चित्रकूट का सुन्दर दृष्य देखा जा सकता है। भरतकूप कहा जाता है कि भगवान राम के राज्याभिषेक के लिए भरत ने भारत की सभी नदियों से जल एकत्रित कर यहां रखा था।

 

अत्रि मुनि के परामर्श पर भरत ने जल एक कूप में रख दिया था। इसी कूप को भरत कूप के नाम से जाना जाता है। भगवान राम को समर्पित यहां एक मंदिर भी है।

 

अनसुइया अत्रि आश्रम स्फटिक शिला से लगभग 4 किलोमीटर की दूरी पर घने वनों से घिरा यह एकान्त आश्रम स्थित है। इस आश्रम में अत्रि मुनी, अनुसुइया, दत्तात्रेयय और दुर्वासा मुनि की प्रतिमा स्थापित हैं।

Written by Rahul Patel - Visit Website
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